प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैश्विक ऊर्जा संकट पर बड़ी चेतावनी...
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोप दौरे के दौरान दुनिया को आगाह किया कि ऊर्जा संकट तेजी से गंभीर रूप ले रहा है। उन्होंने साफ कहा—कोविड, युद्ध और अब ऊर्जा संकट—इस दशक को सचमुच “संकटों का दशक” बना रहे हैं। मोदी ने चेताया कि अगर हमने वक्त रहते इन चुनौतियों को नहीं संभाला, तो कई दशकों में हुई तरक्की मिट्टी में मिल सकती है। करोड़ों लोग फिर से गरीबी रेखा के नीचे जा सकते हैं।
उन्होंने खास तौर पर पश्चिम एशिया के तनाव का जिक्र किया। बोले—अगर हालात नहीं सुधरे, तो ऊर्जा बाजार अस्थिर रहेंगे, ईंधन की सप्लाई रुक सकती है और इसका भारी खामियाजा पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को भुगतना पड़ेगा। मोदी ने दो टूक कहा कि ऊर्जा आपूर्ति पर कोई पाबंदी नहीं लगनी चाहिए और बाजार में स्थिरता आनी ही चाहिए।
भारत, नीदरलैंड्स और दूसरे साझीदार देशों के साथ मिलकर मोदी ने भविष्य की सप्लाई चेन को पारदर्शी, मजबूत और भरोसेमंद बनाने पर ज़ोर दिया। ये बातें प्रधानमंत्री ने हेग, नीदरलैंड्स में भारतीय समुदाय से बातचीत करते हुए रखीं।
इस दौरे में मोदी पांच देश (यूएई, नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे और इटली) जा रहे हैं—जहां ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और तकनीकी सहयोग उनका फोकस है। भारत में भी उन्होंने लोगों से मितव्ययिता बरतने की अपील की: अनावश्यक विदेश यात्रा टालने, सोना कम खरीदने और संभव हो तो घर से काम करने को कहा।
फिलहाल, मध्य पूर्व के तनाव के चलते तेल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं और विकासशील देश इसकी सबसे ज्यादा मार झेलेंगे।
मोदी का ये पूरा संदेश सीधे-सीधे दुनिया के नेताओं को है: युद्ध थामो, ऊर्जा बाजार संभालो, और एक स्थायी, सहज विकास की राह मिलकर खोजो।



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